यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो, तो वह कुंडली 'मांगलिक' कहलाती है। मंगल दोष के कारण विवाह में देरी, जीवनसाथी के साथ अनबन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ सकती हैं।
उज्जैन को मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ स्थित **मंगलनाथ मंदिर** में भगवान शिव के रूप में मंगल की भात (चावल) पूजा करने से मंगल की क्रूरता शांत होती है और जातक को सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
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